स्कूटर सिखा कर बनाया काम भाग – 2

अभी तक आपने पढ़ा कि किस तरह मैंने आंटी को पटाने के प्रयास किया लेकिन काम नहीं बना. लेकिन बाद में स्कूटर सिखाने के बहाने मुझे काम बनाने का मौका मिला. लेकिन अब तक कुछ हो नहीं पाया था. अब आगे-

गाड़ी सिखाने के बहाने यह सब एक हफ्ते तक चलता रहा और अब हम दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई थी. फिर मैंने सोचा कि हाथ मारने का अब सही मौका है. एक दिन आंटी के नीचे आने से पहले ही मैं तैयार हो गया था. उस दिन मैंने अपनी ट्रेक पेंट पहनी थी और अन्दर मैंने अंडरवीयर भी नहीं पहन रखी थी. इसलिए मेरा लंड समझ आ रहा था.

इस बार मैं थोड़ा लेट निकला. रात के करीब 10:30 बजे हुए थे. क्योंकि मैं जहां जाता हूं वहां भीड़ कम होती है. फिर उस दिन भी हमेशा की तरह आंटी आगे आई और मैं उनके पीछे एकदम चिपक कर बैठ गया. उन्होंने हमेशा की तरह उस दिन भी टाइट वाली लेगी पहन रखा था.

मेरा लंड खड़ा था. फिर मैंने लन्ड से उनकी गांड को टच हो गई और यह चीज आंटी समझ गई थी. अब मैं थोड़ी शर्मिंदगी महसूस करने लगा की मुझे अंडरवियर पहनना चाहिए था. लेकिन थोड़ा टाइम जाने के बाद आंटी भी मजे लेने लगी थी. अब वह भी जानबूझकर पीछे की तरफ सरक रही थी. अब मैं समझ गया कि यही मौका है, मार दे हाथ विकी.

फिर मैंने एक्टिवा को साइड में लगाया और आंटी को बोला, “आंटी, आप दो मिनट इंतजार कीजिए”. फिर उनसे इतना बोलकर वहां से दूर फुटपाथ पर साइड में टॉयलेट को गया. अब मेरा लंड मुझे एडजस्ट करना था. मेरा लंड पहले ही पानी पानी हो चुका था. फिर मैं वापस आ गया और मज़ा लेना चालू कर दिया.

अब मैं और आंटी बहुत गर्म हो गए थे. आंटी बार – बार पीछे आकर मेरे लंड का मजा ले रही थी. फिर मैंने मौका देख कर अपना लंड चलती गाड़ी में बाहर निकाला और आंटी के पिछवाड़े छुआ दिया.

‘अब मैं इंतजार नहीं कर सकता था, अगर आज मुझे इसका रेप भी करना पड़े तो मैं करूंगा’ ऐसा सोच कर फिर मैंने उनके बूब्स को भी हाथ लगा दिया. जिससे आंटी परेशान हो गईं और सिर्फ एक ही चीज बोलीं, “विकी, यहां नहीं, कोई देख लेगा”.

यह सुन कर मैं समझ गया कि अब तो आंटी फंस गयी हैं. फिर मैंने अपना बाहर निकाला हुआ लंड अंदर डाला और स्कूटर को साइड में लगाया और फिर आंटी को साइड में ले जाकर आंटी का हाथ अपनी पैंट में घुसेड़ दिया और उनको किस करने लगा.

इधर मेरे दोनों हाथ उनकी गांड पकड़ कर दबा रहे थे. फिर मैंने उनको बोला लेगी निकालो तो उन्होंने मना कर दिया. फिर मैंने खींच कर आधी लेगी निकाल दी और उनको घुमा दिया.

दोस्तों, आंटी की गांड सच में बहुत बड़ी थी. आज मेरा सालों का सपना पूरा हो रहा था. अब आंटी और मैं बहुत गर्म हो चुके थे. फिर मैंने उनकी पैंटी निकाली और गांड के छेद पर अपना मुंह लगा दिया. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. उधर आंटी आहें भर रहीं थीं. उनकी गांड को लिक कर के मैंने अपना मुंह उनकी चूत की तरफ ले गया. वह डॉगी स्टाइल में खड़ी थी.

जब मैंने उनकी चूत खोली तो वह थोड़ी काली और थोड़ी पिंक दिख रही थी. अब मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी और चाटने लगा. आंटी काफी तेज सिसकियां ले रही थी. यह देख मैं समझ गया था कि अंकल कभी यहां तक नहीं आये हैं. अब वह मेरा मुंह अपने दोनों हाथों से अपनी चूत के ऊपर दबा रही थी.

फिर थोड़ी देर बाद आंटी की चूत से पानी आ गया. उनका पूरा पानी मेरे मुंह पर आ रहा था. जैसे ही उनका पानी निकला उसने मेरे सर को जोर से अपनी चूत में दबा लिया. मैं उनका सारा पानी पी गया.

फिर आंटी ने मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया. करीब 7-8 मिनट के बाद मेरा भी पानी आ गया. आंटी सब साफ कर गई और बोली कि अब बाकी का हम कल घर में करेंगे. इसके बाद फिर हम वहां से स्कूटी लेकर घर के लिए निकाल गए.

अगले दिन जैसे ही अंकल ऑफिस गए और बच्चे स्कूल के लिए गए वैसे ही मैं उनके घर पहुंच गया. मुझे पहुंचा देख कर आंटी बोली, “मुझे पता ही था तुम बस मौके का इंतजार कर रहे थे”. आज उसने गाउन पहना हुआ था और लेकिन अंदर कुछ भी नहीं था. फिर मैं बोला, “आंटी, मैं आप पर बहुत दिनों से ट्राय कर रहा था”. तो उन्होंने कहा, “मुझे मालूम है”. यह सुन कर मैं दंग रह गया और मैंने पूछा, “वह कैसे?”

तो वह बोली कि हम औरतें बहुत शातिर होती हैं. हमें सब मालूम है. उस दिन किचन में भी तुम जान बूझकर अपना सामान दिखाने के लिए खड़े थे ना? और आते – जाते जो लिफ्ट में चांस लेते हो वो? तो मैं बोला, “हां आंटी, लेकिन मेरे दिल में आपके लिए बहुत रिस्पेक्ट भी है”.

यह सुन कर आंटी बोलीं, “तो चलो अब सारी रिस्पेक्ट बेडरूम में दिखाना”. फिर मैं और आंटी दोनों उनके बेडरूम में चले गए. अब मैंने आंटी के एक के बाद एक कपड़े उतारना शुरू कर दिया और वो भी मेरे कपड़े उतारने लगीं.

थोड़ी ही देर में हम दोनों एक – दूसरे के सामने नंगे खड़े थे. फिर मैंने आंटी को पकड़ा और उनको लिप किस करने लगा और दूसरे हाथ से उनके मम्मे को दबाने लगा. आंटी को बड़ा मजा आ रहा था और वह लगातार सिसकियां ले रही थी.

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