सेक्सी आंटी के साथ प्रथम अनुभव

किशोरवय मन बड़ा चंचल और जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है. मैं भी ऐसा ही था. सेक्स का अधूरा ज्ञान और सेक्सी आंटियों के बढ़े हुए आगे पीछे के उभार मन को विचलित करने के साथ-साथ पैन्ट के अन्दर भी हलचल मचा देते थे. लेकिन इसी हलचल ने मुझे मेरे प्रथम सेक्स अनुभव का अवसर दिया…

नमस्कार दोस्तों! ये बात तब की है, जब मैं 12वीं कक्षा का छात्र था. हमारे घर के सामने वाले घर में एक फेमिली रहती थी. जिसमे अंकल, आंटी और उनके दो छोटे बच्चे थे. अंकल रोज सुबह जल्दी काम पे निकल जाते और देर रात तक वापिस आते.

आंटी की बात करूँ तो एकदम माल थीं. बिलकुल परफेक्ट फिगर था उनका. उनके बूब्स इतने बड़े थे कि मानो ब्रा में आना ही नहीं चाहते हों. गांड इतनी उभरी हुयी कि जिसे देखकर कोई भी हाथ लगाना चाहे. मैं तो उनके बारे में सोच-सोच कर कई बार हस्तमैथुन कर चुका था.

एक दिन मैं घर पे बैठा टीवी देख रहा था कि डोर बेल बजी. उठकर दरवाजा खोला तो देखा, सामने आंटी खड़ीं थीं.

मैं- नमस्ते आंटी! अन्दर आइये!

आंटी- नहीं! तुम एक मिनट के लिए घर चल सकते हो? मुझे कुछ काम है.

मैं कब उनको मन करने वाला था. मैं उनके साथ चल पड़ा. उनके घर पहुँच तो देखा कि सारा सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा है.

आंटी ने कहा- ये सब छोटा वाला गुस्से में करके गया है.

मैं बोला- कोई बात नहीं आंटी! मैं आपकी मदद कार देता हूँ.

आंटी ने खुश होकर “थैंक यू” कहा और मैं सारा सामान सही से रखने में उनकी मदद करने लगा. इस दौरान कई बार मेरे हाथों से उनके शरीर का स्पर्श हो जाता. कभी उनकी कुहनी तो कभी उनकी गांड. काम करने के दौरान जब भी मेरी नजर उनके बूब्स पे पड़ती तो मेरा लंड सलामी देने लगता. खैर! कुछ ही देर में हमारा काम ख़त्म हो गया. पहले तो आंटी ने सिर्फ धन्यवाद कहा लेकिन जाने क्यों उन्हें लगा कि सिर्फ धन्यवाद न देकर चाय भी पूछनी चाहिए.

उन्होंने कहा- चाय पिओगे?

मैंने ख़ुशी से हाँ में सर हिलाया. आंटी चाय बनाने किचेन में गयीं तो पीछे-पीछे मैं भी चला गया. अब तो मेरी नजर सिर्फ उनके उभरे हुए चूतडों पे थी, जिसे देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो चुका था. मैं लगभग उनसे सटकर उनके पीछे ही खड़ा था. अचानक उनके हाथ से चम्मच छूटकर नीचे गिर गया. वो उसे उठाने के लिए जैसे ही नीचे झुकीं मेरा खड़ा लंड उनकी गांड की दरार से टकरा गया. शायद उन्हें भी मेरे लंड के खड़े होने का एहसास हो चुका था, और इसी वजह से मैं घबरा गया. लेकिन वो उठीं और मेरे लंड की तरफ मुड़ के देखा और मुस्कुराईं. फिर उन्होंने ने जो कहा उसपे मुझे भरोसा नहीं हुआ.

उन्होंने कहा- यहाँ क्यों खड़े हो? सब्र करो. सब्र की चाय और मीठी होगी.

मैं सर हिलाता हुआ बहार आ गया ये सोचते हुए की आखिर ये हुआ क्या? कुछ देर बाद चाय पीकर मैं वहां से चला आया. लेकिन इस घटना के बाद तीन दिनों तक आंटी मुझे जब भी देखतीं तो मुस्कुरातीं. मुझे लगने लगा की उनकी तरफ से ये ग्रीन सिग्नल है लेकिन इस बारे में पूरी तरह से निश्चित नहीं था इसलिए कोई खतरा नहीं लेना चाहता था.

अगले ही हफ्ते मेरे घर के सारे लोग एक शादी अटेण्ड करने हरिद्वार चले गए. लेकिन चूँकि मेरी परीक्षाएं नजदीक थीं इसलिए मुझे घर पे ही रुकना पड़ा. जाने से पहले मेरी मम्मी ने आंटी से मेरे खाने-पीने का ध्यान रखने को बोल गयीं. सभी के जाने के अगले दिन मैं लेट तक सोता रहा और 10 बजे जब कूड़े वाले ने बेल बजायी तो मैं उठा.

मैं सिर्फ अंडरवियर पहन कर ही सोता हूँ और सुबह जब उठता हूँ तो “मॉर्निंग वुड” की वजह से लंड खड़ा ही रहता है. कूड़े वाले को कूड़ा देने के बाद मैं बाथरूम में नहाने चला गया. पानी डालना शुरू किया कि देखा साबुन तो है ही नहीं. तो मैं दूसरे बाथरूम से साबुन लेने चला गया. लंड अभी भी खड़ा ही था.

दूसरे बाथरूम से उसी अवस्था में साबुन लेकर आ ही रहा था कि देखा आंटी सामने खड़ीं थी. मैं दरवाजा बंद करना भूल गया था. आंटी चकित नज़रों से मेरे गीले हो चुके अंडरवियर से उभरे हुए लंड को देख रहीं थी. पहले तो मैं शरमाया लेकिन फिर उनके बूब्स देखकर लंड और कड़ा होने लगा. आंटी ने दरवाजा बंद किया और मेरे पास लौट कर वापिस आयीं.

आंटी- दरवाजा तो बंद कर लिया करो!

मैं- भूल गया था आंटी.

आंटी मेरे लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही सहलाने लगीं. मैं समझ गया आज तो पक्का काम हो जायेगा.

आंटी- अभी से तेरा इतना बड़ा है, आगे जाकर कैसा होगा?

मैं- आंटी! बस आपको देखकर अपने आप खड़ा हो जाता है.

आंटी- अच्छा! तब तो फिर देखना पड़ेगा.

ये कहकर उन्होंने मेरा अंडरवियर उतार दिया और उसे चूमने लगीं. फिर उन्होंने सेक्सी आवाज में कहा – जब से तूने मेरी गांड से इसे टच कराया है उसी दिन से मैं तेरा ये लंड देखना चाहती थी.

मैं- आंटी उस दिन आपकी गांड को देखकर अपने आप खडा हो गया था.

आंटी- अच्छा! तो बता देता. तू तो घबरा के चल दिया था.

मैं- तो अब दिखा दो.

आंटी पीछे मुड़ी और बोली- ले देख!!

मैंने उनकी सलवार नीचे कर दी. इतनी बड़ी, गोरी और मोटी गांड देखकर मुझसे बिलकुल रहा नाहीं गया और बेतहाशा उसे चाटने लगा.

आंटी- अरे आराम से! इतनी जल्दी भी क्या है? रुक एक काम कर… 69 में हो जा.

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