आंटी की चुदाई की कहानी

Indian aunty sex story यह एक आंटी की कहानी है.. जो मेरे बाजू वाले घर में रहती थीं। वो थोड़ी उम्रदराज़ भी थीं.. लेकिन बोलचाल में सहज थीं। उन्हें एक बेटा भी था.. वो यहाँ जॉब करती थीं और उनके पति दूसरे शहर में काम करते थे। मेरी उनसे बोलचाल बढ़िया चलती थी और किसी न किसी कारण से आना-जाना भी लगा रहता था।

एक दिन उनके बेटे की तबियत कुछ ज़्यादा बिगड़ गई और उन्होंने मुझे बुलाया, मुझे डॉक्टर को बुला लाने के लिए कहा।
मैं भी तुरंत उनकी मदद करते हुए डॉक्टर को ले आया। डॉक्टर ने कहा- बुखार कुछ ज़्यादा है.. और उसके पास रात भर किसी को रहना पड़ेगा।
मैंने उनके पति को भी इनफॉर्म कर दिया.. लेकिन वो व्यस्त थे.. इसलिए एक दिन बाद आने वाले थे।

डॉक्टर चले गए.. उन्होंने कुछ दवाईयां दीं जो खरीदने के लिए मैं मेडिकल स्टोर पर गया और लौटा तो देखा आंटी मुझे फोन ही लगा रही थीं और साथ में रो भी रही थीं।

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उन्होंने मुझे बताया उनका बेटा बाथरूम में चक्कर आने के वजह से गिर गया है। हम दोनों ने उसे वापिस बिस्तर पर लिटाया और दवाई देकर सुला दिया।
आंटी बेडरूम में चली गईं।
मैंने उन्हें आवाज़ लगाई.. क्योंकि मुझे उन्हें दवाई के बारे में भी बताना था।
लेकिन वो आई नहीं..

मेरे पति 70 से ऊपर के हैं, फिर भी रोज 2 घंटे सेक्स करते हैं।
मेरे पति 70 से ऊपर के हैं, फिर भी रोज 2 घंटे सेक्स करते हैं।

मैं ढूँढते हुए अन्दर गया तो देखा कि वो दीवार से लग कर सिसकियाँ ले रही थीं और रोए जा रही थीं।
मैंने उन्हें समझाते हुए कहा- मैं हूँ न.. अगर कुछ भी लगे तो..
मुझे समझ नहीं आ रहा था उन्हें रोने से कैसे रोकूँ, मैंने उनके हाथ को पकड़ते हुए बोला- आंटी.. प्लीज़.. आप रोए ना.. अभी तो आपको अपने आपको संभालना होगा।

यह बात करते ही वो मेरी बाँहों में लिपट कर रोने लगीं.. बोलने लगीं- काश मेरे पति हमारी तरफ ध्यान देते और मुझे आत्मीयता से अपना बनाते..
मैं उन्हें समझाते हुए उनकी पीठ सहलाने लगा.. मेरा कोई गलत इरादा नहीं था.. पर जाने क्यों मैं उन्हें और वो मुझे.. बाँहों में कसने लगी।
दोनों के बीच कोई दूरी नहीं थी।

मैंने एक बार नीचे देखते हुए उनके होंठ चूम लिए। हम दोनों एक-दूसरे को देखने से कतरा रहे थे.. लेकिन कोई किसी को रोक नहीं रहा था।
मैंने फिर से उन्हें देखा और इस बार होंठ से होंठ चूम कर उन्हें जीभ से चाटने लगा। आंटी भी मेरे बालों को सहलाते हुए मुझे चुम्बन करने लगीं।
मैं उन्हें कमर से दबोच के दीवार से सटा कर मदहोशी से उन्हें चूमने लगा, हमारी उंगलियाँ एक-दूसरे में मिलने लगीं..

उनका पल्लू भी नीचे गिर गया और मैं उन्हें गले पर चूमते हुए क्लीवेज तक आया, मैंने ब्लाउज से क्लीवेज में जीभ सरका दी और वो सीत्कारें भरने लगीं।
मैं ब्लाउज के ऊपर हाथ से उनके दोनों मम्मे सहलाते हुए उनकी दूध घाटी को चाट रहा था।
मैं नीचे को झुका और पेट को कस कर चूम लिया, उनकी नाभि में जीभ घुमाने लगा।

मैंने आंटी को देखते हुए अपनी टी-शर्ट उतारी, फिर उनके ब्लाउज का एक-एक हुक खोलते हुए उन्हें चूमने लगा। उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी.. इसलिए उनके मम्मे मेरे चेहरे पर घिसने लगे।

मैंने ब्लाउज को हटाते हुए एक निप्पल चूसते हुए मुँह में ले लिया और दूसरे मम्मे को मसलने लगा। वो दीवार से सटकर खड़ी थीं और मैं उनकी गाण्ड पकड़ कर दोनों मम्मों को बारी-बारी से चूस रहा था।

मैं जल्दी ही उनकी पूरी साड़ी खोल दी.. पेटीकोट के नाड़े को दाँतों से खोला और वो नीचे गिर पड़ा।
मैं जीभ से ही उनकी पैन्टी को चूमने लगा, फिर पैरों को ऊपर से नीचे चाट-चाट कर पैन्टी गीली कर दी।

वो मेरे बालों को सहलाते हुए सर दबाने लगी।
मैं पैन्टी हटाने की कोशिश कर ही रहा था.. पर उन्होंने रोक लिया, मुझे ऊपर बुलाते हुए कंधे पर किस किया।
हमने एक-दूसरे को बाँहों में लिया और बेसब्री से चूमने लगे। उन्होंने मुझे दीवार से लगाते हुए मेरी छाती पर हल्के से काट लिया। फिर मेरे कंधे पर काट लिया और फिर होंठ से होंठ मिला दिए।
मैंने उन्हें कसके पकड़ा और बिस्तर की तरफ ले चला, हम दोनों बिस्तर पर गिरे और एक-दूसरे को कसके आलिंगन में भरते हुए किस करने लगे।
बार-बार.. लगातार.. कभी मेरी जीभ उनके होंठ में कभी उनकी जीभ मेरे होंठ में मजे ले रही थी।

मैंने आवेश में आकर उनकी पैन्टी निकाल फेंकी, उनकी फ़ैली हुई टाँगें बिस्तर के नीचे थीं, मैं बिस्तर के नीचे बैठा और टाँगों को अन्दर से चूमते हुए.. उनकी टाँगें ऊपर से नीचे तक चाटने लगा।
अचानक मैंने उनकी जाँघ पर हल्के से काट लिया और चूत के इर्द-गिर्द गोल-गोल जीभ घुमाने लगा, उनकी चूत पर होंठ लगा कर एक किस लिया, फिर बार-बार होंठ दबाते हुए उसे चाटने लगा।

वो ‘आहें..’ भरते हुए मेरा सर चूत में दबाने लगीं, उनकी टाँगें मेरे कंधों पर कसने लगीं।
मैंने चूत पर थूका और थूक फ़ैलाते हुए जीभ को चूत में सरका दिया।
वो उचक गईं लेकिन वो टाँगों के बीच मेरा सर और दबाने लग गईं, मैं चूत के दाने को हिलाते हुए चूत के अन्दर-बाहर तेज़ी से जीभ घुमाने लगा।

चूत काफ़ी गीली हो रही थी और उन्होंने अचानक टाँगें कसके अपना रस मुझे पर छोड़ दिया, कुछ पल मुझे जकड़े रहीं.. फिर वो बेड पर उठ कर बैठ गईं।

मैं उनके सामने खड़ा था.. उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए मेरे पैन्ट के हुक को खोला.. ज़िप खोली और मेरे लंड को बाहर निकाला।
मैंने लौड़े को हिलाते हुए उनके होंठों पर रखा.. और उसे मसलने लगा।
उन्होंने अपने होंठ खोल दिए.. जुबान को बाहर निकल कर लौड़े के टोपे को चूसने लगीं।

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