मैं और मेरी सेक्सी भाभी!

मैं पहले दिन से ही अपनी सेक्सी भाभी का दीवाना था. लेकिन आग दोनों ओर बराबर लगी थी. हम दोनों ने घर में अकेले रहने का फायदा उठाते हुए अपनी भड़कती वासना को शांत किया.

हेलो दोस्तो! मेरा नाम सोनू है। मै 12वीं कक्षा का छात्र हूँ।

मेरे परिवार में मेरे अतिरिक्त मेरे माता-पिता और भैया-भाभी हैं। भैया दूसरे शहर में काम करते हैं। जब भी मेरी नज़र मेरी सेक्सी भाभी पे पड़ती, तो उन्हें देखकर मैं पागल हो जाता। किसी न किसी तरह भाभी को छूने की कोशिश करता रहता था। वो जब भी मेरे कमरे में झाड़ू लगाने आतीं और जैसे ही झुकतीं तो मेरा ध्यान सीधे उनके ब्लाउज़ के अन्दर चला जाता। क्या गजब बूब्स हैं उनके? जी करता है कि बस पकड़ कर मसल दूं। पर मैं तो सिर्फ़ उन्हे देख ही सकता था।

भाभी और मुझमे बहुत ही अच्छी जमती थी। हम हँसी-मजाक भी कर लेते थे। पर कभी भी घर में अकेले नहीं होते थे। कोई न कोई हमेशा रहता था। मैं सोचता था कि, काश! एक दिन मैं और भाभी अकेले रहें तो शायद कुछ बात बने।

सर्दी का मौसम था। घर के सभी सदस्यों को एक रिश्तेदार की शादी में चेन्नई जाना था। भैया तो रहते नहीं थे। मम्मी-पापा, मैं और भाभी ही थे। पापा ने पूछा कि –

शादी में कौन-कौन जा रहा है?

तो मैने कहा- मेरे तो एक्ज़ाम्स आ रहे है। मैं तो नहीं जा पाउंगा।

मम्मी बोली कि- चलो ठीक है, इसकी मर्जी नहीं है तो इसे यहीं रहने दो, पर इसके खाने का प्रॉब्लम हो जायेगा।

इतने में मैं बोला कि – भाभी और मैं यहीं रह जायेंगे। आप दोनो चले जायें।

सबको मेरा आइडिआ सही लगा। अगले दिन मम्मी पापा को मैं ट्रेन में बिठा आया।

अब मैं और भाभी ही घर में थे। भाभी ने आज गुलाबी साड़ी और ब्लाउज पहन रखा था। ब्लाउज़ के अन्दर से ब्रा, जो की क्रीम कलर की थी, साफ़ दिख रही थी। मैं तो कंट्रोल ही नहीं कर पा रहा था। पर भाभी को कहता भी तो क्या?

तभी भाभी बोली- थैंक यू देवर जी!

मैने कहा – किस बात के लिए?

भाभी – मेरा भी जाने का मूड नहीं था। अगर आपकी पढ़ायी डिस्टर्ब न हो तो आज मूवी देखने चलें?

मै – चलो। पर कोई अच्छी मूवी तो लग ही नहीं रही है। सिर्फ़ मर्डर ही लगी हुई है।

भाभी – वो ही चलते हैं।

मैं तो चौंक गया। लेकिन भाभी ड्रेस चेंज करने चली गईं। वापस आयी तो उन्होने डीप कट ब्लाउज़ पहना था। उनके ब्रा और बूब्स के दर्शन हो रहे थे। मैने कहा-

भाभी! अच्छी दिख रही हो।

भाभी बोली – थैंक्स!

हम सिनेमा हाल गये। इत्तेफ़ाक से हमें सीट भी सबसे ऊपर कोने में मिली। फ़िल्म शुरु हुई। मेरा लंड तो काबु में ही नहीं हो रहा था। अचानक परदे पे मल्लिका का कपड़े उतारने वाला सीन आया। मैं देख रहा था कि भाभी के मुंह से भी सिसकारियाँ निकलनी शुरु हो गई हैं और भाभी मेरा हाथ पकड़ कर मसलने लगी। मेरा भी हौसला बढ़ा। मैने भी भाभी के कंधे पर हाथ रख दिया और धीरे-2 मसलने लगा।

हॉल में बिल्कुल अंधेरा था। मेरा हाथ धीरे-2 भाभी के बूब्स पर आ गया। भाभी ने भी कुछ नहीं कहा। वो तो फ़िल्म का मज़ा ले रही थी। अब मैं ब्लाउज के ऊपर से भाभी के बूब्स को मसल रहा था और उसके बाद मैने उनके ब्लाउज़ में हाथ डाल दिया। भाभी सिर्फ़ सिसकारियाँ भरती रही और मुझे कोऑपरेट करती रही। अब फ़िल्म समाप्त हो चुकी थी।

हम दोनो घर आ गए। मैने पूछा –

क्यों भाभी? कैसी लगी फ़िल्म?

भाभी बोली – मस्त!

मैने कहा – भाभी ! भूख लगी है।

इसके बाद, हम दोनो ने साथ में खाना खाया। खाने के बाद, मैं अपने कमरे में चला गया। इतने में भाभी की आवाज आयी –

क्या कर रहे हो देवर जी? जरा इधर आओ न।

मैं भाभी के बेडरूम में गया, तो भाभी बोली-

ये मेरी ब्रा का हुक बालों में अटक गया है। प्लीज़ निकाल दो न।

भाभी सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में ही थी। उसने क्रीम रंग की ब्रा पहन रखी थी। मैने ब्रा खोलने के बहाने उसके निप्पलों को भी मसल दिया और पूरी पीठ पर हाथ फ़िरा दिया। मैने कहा-

भाभी लो! खुल गई ब्रा।

मैने ब्रा को झटके से नीचे गिरा दिया। अब भाभी पूरी टॉपलेस हो चुकी थी। हम दोनो फ़ुल फॉर्म में आ चुके थे। भाभी बोली-

देवर जी! भूख लगी है तो दूध पी लो।

मैने भाभी को उठाया और बिस्तर पर ले गया ।उनका पेटीकोट भी खोल दिया। अब वो पूरी तरह नंगी हो चुकी थी और मैं भी।

मैने शुरुआत उपर से ही करना मुनासिब समझा और भाभी के लाल लिपस्टिक लगे रसीले होठों को जम कर चूसा। उसके बाद बारी आयी उनकी छाती की, जिस पर दो मोटी-2 दूध की टंकिया लगी थीं। उनके निप्पल का सबसे अगला हिस्सा बिल्कुल भूरा था। मैने भाभी के बूब्स को इतना मसला और चूसा कि सच में ही दूध निकल आया। मैने दोनो का जम कर आनन्द लिया।

भाभी के मुंह से तो बस सिसकारियाँ निकल रही थीं । आह आआआअह आआआआआह्हह। अब मैं बूब्स से नीचे भाभी की चूत पर आया। क्या क्लीन शेव चूत थी? एक भी बाल नहीं। मैने पहले तो भाभी की चूत को खूब चाटा फिर ट्रिपल एक्स फ़िल्मो की तरह जोर-2 से उंगली करने लगा। भाभी “आअह आआआह देवर जी!” कर रही थी। फिर मैने भाभी को घोड़ी बनने के लिये कहा। भाभी घोड़ी बन गई तो मैने अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया और जोर-जोर से चोदने लगा। इस तरह मैने 30 मिनट तक भाभी को अलग-अलग पोजिशन में चोदा (सोफे पर भी)।

अब मैं थक गया था। भाभी बोली “तुमने तो मेरे बहुत मज़े ले लिए। मेरे शानदार फ़ीगर वाले बूब्स को चूस-चूस कर और मसल-मसल कर लटका दिया और खाली कर दिया अब मेरी बारी है”। मैं लेट गया। भाभी मेरे उपर चढ़ गई और मेरे सीने को मसलने और चूसने लगी और मेरे भी छोटे-छोटे बोबे निकाल दिये। मैं भी भाभी के बूब्स को मसल रहा था फिर भाभी मेरे लंड को पकड़ कर चूसने लगी। करीब 15 मिनट तक उसने मेरे लंड को चूसा।

अब हम दोनो को नींद आ रही थी। हम उसी हालत में सो गये। सुबह उठ कर हम दोनो साथ मे ही टब में नहाये । मैने भाभी के एक-एक अंग को रगड़-रगड़ कर धोया। इसके बाद भी हम दोनों कई दिन तक सेक्स का आनंद लेते रहे। अब जब कभी भी मौका मिलता है तो हम दोनों शुरु हो जाते हैं। साथ में घर पर ही नेट पर साइट्स देखते हैं। मुझे तो साड़ी सेक्स बहुत पसन्द है। एक-एक कपड़ा, ब्लाउज, साडी, ब्रा और पेटीकोट खोलने का मज़ा ही कुछ और है।

मेरी कहानी पे आपकी प्रतिक्रियाओं का इन्तजार रहेगा ।

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