शीला की जवानी और साथ में ऑरेन्ज् फ्लेवर

हैल्लो दोस्तों, कैसे antarvasna हो आप सब? दोस्तों मेरा नाम सुरेश है मैं अभी मुंबई में रहता हूँ और पूना गोवा, बैंगलोर घूमता रहता हूँ और दोस्तों मेरी उम्र 26 साल है। दोस्तों आज मैं आप सभी कामलीला डॉट कॉम के मंच पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालों की सेवा में अपना एक सबसे मस्त मज़ेदार सेक्स अनुभव लेकर आया हूँ, जिसमें मैंने अपनी जान पहचान वाली शीला भाभी को उन्ही के घर पर बहुत जमकर चुदाई के मज़े देकर उनकी प्यास को बुझाकर पूरी तरह से संतुष्ट किया था और यह सब मैंने कैसे किया आप लोग खुद ही पढ़कर इसके मज़े ले।

दोस्तों मेरी पहचान वाली शीला भाभी का फिगर एकदम मस्त था 34-30-36 और उनका रंग एकदम सफेद गोरा था। उसका नाम शीला था उनकी उम्र 29 साल थी और वो एकदम सेक्सी दिखती थी वो हमेशा हमारे घर पर आती जाती रहती थी। मैं उनको देखकर बहुत हॉट फील करता था और वो भी मुझे बड़ी कातिल नज़रो से देखती थी और नॉटी स्माईल करती रहती थी, आप तो जानते ही हो की जवानी तो जवानी होती है और मैं आपको बता दूँ मुझे ख़ासकर शादीशुदा आंटी भाभी और कसी हुई भरी गांड और मस्त बूब्स वाली औरतें ज्यादा पसंद है और मैं हमेशा उनके बारे में सोचता रहता हूँ और आज कल तो मैं रोज 6 या 7 बार मूठ मारता हूँ तभी मेरा लौड़ा शांत होता है वरना नींद ही नहीं आती। मैं अब उनको देखते हुए आँखों से इशारे करने लगा और मैंने अब साहस भी किया की कुछ तो ट्राई करना ही है तो मैंने उनके मोबाईल पर कॉल किया और ऐसे ही बोला की भाभी मुझे आपसे कुछ बात करनी है क्या आप मुझे मिल सकती हो? तो वो थोड़े नखरे करने लगी और मैं थोड़ा निराश हो गया, मगर रात को उन्होंने मेरी मम्मी को कॉल किया और बोला की आज उनके पति रात वाली ड्यूटी के लिए जा रहे है और बच्चे उनके भाई के यहाँ छुट्टी बिताने गये है तो उसने मम्मी से कहा की आज रात सुरेश को हमारे यहां सोने के लिये भेज देना मैं यह सब सुनकर बहुत ख़ुश हुआ और ज़ट से मेरा काम खत्म करके उनके घर पर चला गया दरवाज़ा खोलते ही उसने मुझे नॉटी स्माईल से कहा आओ अंदर और जब मैं घर के अन्दर दाखिल हुआ तो उन्होंने अंदर से दरवाज़ा बंद कर दिया। मैं अन्दर जाते ही उनकी भरी हुई गदराई गांड को देखकर मैं अपने होठों पर जीभ फेरते हुए बातें करने लगा अब वो बोली कुछ लोगे क्या? तो मैंने कहा क्यों नहीं जब आप देने को तैयार है तो भला कौन मना कर सकता है।

यह कहते हुए मैंने उनके बड़े बड़े तने हुए बूब्स को देखते हुए बोला की आम का रस है क्या, तो उन्होंने बोला है तो सही मगर मुझे कुछ खट्टा मीठा नमकीन पसंद है तो मैंने बोला कोई बात नहीं संतरे भी चूसने में बहुत मज़ा आता है यह कहते हुए मैंने आँख मारते हुए बोल दिया। तभी वो किचन में गयी मैं भी उनकी मटकती हुई गांड को देखते हुए उनके पीछे पीछे चला गया अब वो चलते समय गांड को कुछ ज्यादा ही मटक मटकाकर चली जा रही थी अब उसने ऑरेंज के छिलके को सहलाते हुए कहा की सुरेश तुम निकालोगे या मैं खुद ही निकालु और कहते हुए अपने गुलाबी होठों पर जीभ घूमाते हुए एक स्माइल देते हुए अपने मुहँ में लेकर ऐसे चाटने लगी जैसे वो लंड को अपनी जीभ से सहला रही हो, मैं भी बोला वैसे भाभी मुझे भी तो चुसाओ कहते हुए उन्होंने संतरे का आधा हिस्सा अपने मुहँ में लेकर बोला खुद खा लो चूस लो, रोका किसने है कहते हुए मैं मेरा मुहँ पास लेकर उनके मुहँ से संतरे को चूसना शुरु कर दिया। हम दोनों अब एक ही टुकड़े को चूसते चूसते अब एक दूसरे के होठों को चूसने लग गये अब मैं उनकी पीठ को सहलाते सहलाते भरी हुई गदराई गांड को सहलाने और दबाने लगा अब हम एक दूसरे की जीभ से जीभ लड़ाते चूसते हुए किस को लम्बा करने में लग गये बीच बीच में हम संतरे के टुकड़े खत्म होते ही दूसरा टुकड़ा मुहँ में डाल लेते थे अब हम संतरे के टुकड़े और हम दोनों की रसीली जीभ को चाटते चाटते मस्त होकर बहुत गरम हो चुके थे अब हम एक दुसरे को खूब ज़ोर ज़ोर से बांहों में जकड़कर जबरदस्त किस कर रहे थे।

फिर मैंने उनके बड़े बड़े बूब्स को जबरदस्त तरीके से मसलते हुए गांड को भी दबाते हुए मस्त चिकनी पीठ को सहलाते चूसते हुए हम दोनों मज़ा करने लगे, मैं अब उनके ब्लाउज को खोलते हुए नीचे गर्दन से लेकर बूब्स को चूसते हुए साड़ी ऊपर उठाते हुए उनकी भरी हुई गदराई चिकनी गोरी गोरी जांघों को सहलाते हुए चूमने लगा वो इईए.. ऊओह. ससीसी. करते करते आहें भरती हुई मेरे बालों को नोचते हुई मेरे सिर को नीचे दबाते हुए मचलने लगी अब मैं उनकी गहरी नाभि को हल्के से जीभ डालकर चूसने लगा वो चटपटाने लगी आऊमा. ओहह. गांड को पेंटी के अंदर हाथ डालकर मसलते हुए उनकी गांड के छेद को उंगली से छेड़ने लगा। वो आआह. उउहह. आउच. क्या करर रहे हो जानन्न. मैं ऐसे पागल हो जाउंगी कहते हुए मेरा हाथ हटाने लगी। अब मैंने उनको वहीं पर लेटाया वो लेटे लेटे मेरी आँखो को देखती रही और मैं अब उनकी मस्त गोरी गोरी जांघों को चूमने चाटने लगा और वो मेरे बालों को उंगलियों से पकड़कर खिंचती हुई छटपटाने लगी मैंने अब उनकी खुश्बुदार पेंटी को सूंघते हुए पेंटी के ऊपर से ही चूत को हल्के से काटने लगा अब वो पागलों की तरह अपना सर यहाँ वहाँ करते हुए ज़ोर ज़ोर से आहें भरने लगी और मेरे बालों को नोचती रही, मैंने वहाँ पड़ा हुआ संतरे का एक पीस लेकर उनकी चूत में आधा घुसाया उस कूल और ठंडे संतरे का टुकड़ा चूत में घुसते ही उसका बदन सिहर उठा और मैंने उनके बूब्स को सहलाते दबाते अब मेरे मुहँ में आधा संतरे का टुकड़ा लेकर चूसने लगा और अपना मुहँ उसकी चूत में ले जाकर संतरे के जूस को ज़ोर ज़ोर से चुसने लगा जिससे वह आह.. इस्स. वूहह. की हरकतों से पागलों की तरह छटपटाने लगी और मेरे को हँसते हुए देखकर एक ज़ोर से चांटा मारा गाल पर। वो गुस्से में आँखे दिखाती हुए बोली अब तो छोड़ दे साले कुत्ते कब से चूत को चाट रहा है अब रहा नहीं जाता अब चोद मुझे वरना मैं सह नहीं पाऊँगी, ये सब मुझसे अब सहन नहीं होगा और फिर मैंने भी वैसे ही जोश में अपने कपड़े निकाले और उनकी जांघों को फैलाकर मेरा तना हुआ लंड उनकी चूत को थप थपाकर बोला आज मेरी तमन्ना पूरी होगी, और वो मेरे लंड को देखकर बोली साले घोड़े के जैसा लंड कहाँ छुपाया हुआ था अब तक, आज से मैं तेरी घोड़ी हूँ। दोस्तों यह कहानी आप कामलीला डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

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