शिमला की ठंड में अंकल का लंड अपनी योनि में लेकर अलग ही मजा आया

वह मुझे अपने दूसरे घर पर ले गए जो कि उनके घर से कुछ ही दूरी पर था, जब उन्होंने मुझे अपने उस घर की चाबी दी तो मैंने उन्हें कहा कि मैं कल सुबह आपसे आकर मिलती हूं। मैंने अपने पिताजी को फोन कर दिया और मेरे पिताजी कहने लगे कि तुम्हें किसी भी प्रकार की कोई परेशानी तो नहीं है, मैंने उन्हें कहा कि संजीव अंकल बहुत ही अच्छे हैं और वह बहुत ही कॉर्पोरेट कर रहे हैं, उन्होंने मुझे अपने दूसरे घर की चाबी देदी है और मैं उनके दूसरे घर में ही रुकी हुई हूं। मेरे पिताजी कहने लगे कि संजीव का नेचर बहुत ही अच्छा है, वह मुझे बहुत ही ज्यादा मानता है लेकिन उसने किसी वजह से जल्दी रिटायरमेंट ले लिया इसलिए वह घर पर ही रहता है।

मैंने अपने पिताजी से कहा मैं आपको कल फोन करती हूं, मुझे बहुत ज्यादा नींद आ रही है। मैं उस दिन सो गई और अगले दिन जब मैं संजीव अंकल से मिली तो वह मुझे पूछने लगे की तुम्हे किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत तो नहीं हुई, मैंने उन्हें कहा नहीं मुझे किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई। वह मुझे कहने लगे चलो मैं तुम्हें आज शिमला घुमाता हूं, वह मुझे अपने साथ शिमला घुमाने ले गए। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था, मैंने संजीव अंकल से कहा कि क्या आपको अपनी पत्नी की कभी याद नहीं आती, वह कहने लगे मुझे याद तो बहुत आती है लेकिन मैंने अपने आप को अकेले रहना ही सिखा लिया है इसलिए अब मुझे इस बात का फर्क नहीं पड़ता। उन्हें भी मेरे बारे में पता था इसलिए वह मुझसे पूछने लगे कि तुम्हारे और तुम्हारे पति के भी रिलेशन ठीक नहीं चल रहे हैं, मैंने उन्हें कहा कि हां हम दोनों के बीच में रिलेशन ठीक नहीं है।

जब हम लोग घूम कर वापस लौटे तो सजीव अंकल कहने लगे मैं तुम्हें अपना बेडरूम दिखाता हूं। वह मुझे अपने बेडरूम दिखाने लगे जब मैं उनसे साथ बैठी हुई थी तो उनका हाथ मेरी जांघ पर लग गया। मैंने अपने हाथ को उनकी जांघ पर रख दिया वह भी पूरा मूड में आ चुके थे और उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया। अंकल ने जब मुझे अपनी बाहों में लिया तो मुझे अच्छा लगने लगा मैं भी उनसे चिपकने लगी। मैने संजीव अंकल से कहा कि आज आप मेरी इच्छा पूरी कर दो। उन्होंने जब अपने 9 इंच मोटे लंड को बाहर निकाला तो मैंने तुरंत उसे अपने मुंह में ले लिया और बड़े अच्छे से सकिंग करने लगी। मैंने उसे बहुत अच्छे से चूसा जिससे कि उनका लंड पानी छोड़ने लगा। उन्होंने मुझे नंगा किया तो संजीव अंकल कहने लगे तुम्हारी योनि टाइट है। जैसे ही मेरी योनि के अंदर उन्होंने अपनी उंगली को डाला तो मुझे अच्छा महसूस हुआ मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैनै अंकल से कहा आप अपने कड़क और मोटे लंड को मेरी योनि के अंदर डाल दो। जैसे ही मेरी योनि के अंदर उनका लंड प्रवेश हुआ तो मुझे बड़ा दर्द हुआ और मैं चिल्लाने लगी।

संजीव अंकल कहने लगे तुम्हारी चूत बिल्कुल मेरी पत्नी की योनि जैसी है। मैं उनका पूरा साथ देने लगी उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया और तेज झटके देने लगे मुझे पूरा आनंद आ रहा था और संजीव अंकल भी कहने लगे कि मुझे तुम्हें चोदकर बड़ा मजा आ रहा था लेकिन कुछ झटकों के बाद जब उनका वीर्य मेरी योनि के अंदर गया तो मुझे बहुत ज्यादा अच्छा महसूस हुआ। मैंने अपनी योनि को साफ किया कुछ देर तक हम लोग ऐसे ही नंगे बैठे हुए थे लेकिन मेरा मन दोबारा से सेक्स करने का हो गया। मेरे अंकल के लंड को चूसते हुए दोबारा से खड़ा कर दिया और मैं उनके ऊपर बैठ गई। जैसे ही उनका लंड मेरी योनि में घुसा तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। मैं बड़ी तेजी से अपनी चूतडो को हिलाने पर लगी हुई थी। जैसे ही मैं अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करती तो मुझे अच्छा लगता। अंकल कहने लगे तुम और भी तेज तेज करो मैंने बड़ी तेज तेज अपनी चूतडो को हिलाना शुरू कर दिया जिससे कि संजवी अंकल की इच्छा भी पूरी हो रही थी और मेरी इच्छा भी पूरी होने लगी। हम दोनों की जिंदगी एक जैसी ही है उनके जीवन मे उनकी पत्नी की कमी है और मेरे जीवन में मेरे पति की कमी है इसीलिए हम दोनों एक दूसरे की जरूरतों को पूरा कर रहे थे। आधे घंटे तक ऐसे ही करने के बाद संजीव अंकल का गिरने वाला था। उन्होंने मुझे कहा कि तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लो। मैंने जैसे ही उनके लंड को अपने मुंह में लिया तो उनका वीर्य मेरे मुंह के अंदर गिर गया। मैं बहुत दिनों तक शिमला में रही संजीव अंकल के साथ मैंने अच्छे से सेक्स किया। मैं जब भी शिमला जाती हूं तो संजीव अंकल के साथ में सेक्स करती हू।