मेरी छात्रा की पहली चुदाई

आखिर कुछ देर बाद वो उठकर मेरी बगल में बैठ गयी। उसके बदन की गर्माहट से मेरा बुरा हाल हुआ जा रहा था, लन्ड जीन्स के अंदर फड़फड़ाने लगा था पर मैंने उसे छुआ नहीं। मैं जानता था छोटी सी गलती सब खेल चौपट कर सकती थी।

दीक्षा- सर… मुझे आपसे एक बात करनी है.
मैं- दीक्षा, डरो मत, तुम्हारी हर मुश्किल को सुलझाने में मैं तुम्हारी मदद करूँगा। बताओ क्या बात है?
दीक्षा- सर… सर मैं एक लड़के से प्यार करती हूँ।
उसने रुक-रुककर डरते हुए कहा।

मेरा तो दिल बैठ गया ‘लो… जिस बात का डर था वो ही हुआ!’ पर मैंने खुद से कहा पर खुद को संभाले रखा।
मैं- यह तो अच्छी बात है दीक्षा, इसमें बुराई क्या है? प्यार तो दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ है।

उसकी आँखों में आंसू देख कर मैं उसके पास गया और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए मैंने अपनी बात जारी रखी- दीक्षा, बोलो क्या बात है?
दीक्षा- सर पहले आप प्रॉमिस करो आप नाराज़ नहीं हो जाओगे मेरी बात सुन कर!
मैं- बाबा प्रॉमिस… अब तो बोलो क्या बात है?
दीक्षा- सर… वो और कोई नहीं, आप ही हैं। मैं दिन रात आपके बारे में ही सोचती रहती हूं इसलिए… आई… लव… यू… स्स्स… !
वो अपनी बात भी पूरी न कर सकी कि उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

मैंने दीक्षा को बांहों में भर लिया और उसके गालों पर एक किस की और बोला- दीक्षा, आई लव यू टू!
दीक्षा ने मेरी आँखों में देखा और अपना चेहरा हल्का सा ऊपर उठाया और मेरे लबों को चूम लिया।
“आई लव यू!” उसने फिर कहा उसके इन शब्दों ने मेरे लिए अजीब उलझन पैदा कर दी, एक अजीब सी भावना मेरे दिल में उमड़ पड़ी जो शायद प्यार ही थी।

मेरे हाथ जो उसकी कमर पर थे अपने आप नीचे आ गए। मेरा दिल बैचैन हो उठा, मैंने उसे जाने के लिए कह दिया.
दीक्षा- आप नाराज़ हो गए न… इसीलिए मैं नहीं बता रही थी… प्लीज नाराज़ मत हो ना।
उसकी बच्चों सी मासूमियत ने मेरे अंदर तूफान ला दिया था। एक तरफ मैं उससे प्यार करने लगा था तो दूसरी तरफ मेरी वासना बढ़ती जा रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। जिसके कारण मेरा ग़ुस्सा बढ़ता चला गया और मैं उस पर बरस पड़ा- दीक्षा जाओ यहाँ से… वरना मैं कुछ कर बैठूँगा. तुम्हें पता भी है कि तुमने किस तरह के इंसान से प्यार कर लिया है?
मैंने उसे उसकी बाजू से पकड़ कर हिलाते हुए कहा।
और सोफे पर बैठ गया।

मुझे लगा था वो डर जाएगी और चली जायेगी… पर नहीं, वो जाने के बजाए मेरे पास आ गयी और मेरी गोद में मेरी तरफ मुँह करके बैठ गई उसके विकसित स्तन मेरी मजबूत छाती से टकराने लगे, उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों से पकड़ लिया और जैसे एक माँ अपने बच्चे को चूमती है बिल्कुल वैसे ही चूमते हुई बोली- शोना क्या बात है… बोलो न?
उसके इस प्यार भरे लहजे से मैं और ज्यादा गुस्से और वासना से भर गया और उसकी टॉप को उतार कर फेंक दिया और बोला- यह चाहता हूँ मैं… बोलो दे सकोगी?

मैं सोच रहा था वो गुस्सा होगी, मारेगी या रोयेगी!
पर उसने ऐसा कुछ नहीं किया बल्कि चुपचाप अपनी ब्रा भी खोल दी। उसके गोल-2 स्तन बाहर लुढ़क पड़े।
मैंने उसके एक स्तन के गुलाबी चूचुक को अपने मुंह में ले लिया चूसने लगा.
वो सिसक उठी- आह… माँ…

उसकी सिसकारियों ने मुझे और जोश दिला दिया और मैं उसके खूबसूरत मम्मों पर भूखे भेड़िये की तरह टूट पड़ा और उन्हें कभी चूसता. जब चूसते चूसते थक जाता तो उन्हें आटे की तरह गूंधने लगता।
उसकी कामुक आहें पूरे कमरे में गूंज रही थी।

मैं पूरा गर्म हो चुका था, अब और रुकता तो लन्ड पैंट में ही झड़ जाता। मैंने उसे कमर से पकड़ के उठाया और सोफे पर फेंक दिया और उसे मेरी पैंट खोलने को कहा।
मैं- खोल इसे मेरी जान, इसमें तेरे लिए एक तोहफा है।
दीक्षा- नहीं, मुझे शर्म आती है।
मैं- साली नाटक मत कर, खोल इसे!
मैंने उसकी एक चूची को ज़ोर से मसलते हुए कहा।

वो दर्द से कराह उठी और उसने मेरी बेल्ट खोल दी और रुक गयी।
वो डर भी रही थी, शर्मा भी रही थी और झिझक भी रही थी.

मैं समझ गया इसकी तो पहली बार है इसलिए मैंने थोड़ी चालाकी दिखाई और उसे सोफे पर लिटा दिया और और खुद भी उस लेट गया और उसके गालों पर किस करते हुए मैंने काफी बार उसे ‘आई लव यू!’ कहा।
धीरे-2 उसका डर एक बार फिर मुस्कुराहट में बदल गया, उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया। आज तक मैंने उसे वासना की नज़र से ही देखा था पर आज मैं देख पा रहा था कि सच में कितनी सुंदर है वो!

मैंने उसके होंठों पर हल्की सी किस की, उसने भी वैसा ही जवाब दिया और मेरे होंठ चूमने के लिए वो हल्की सी ऊपर उठी.
पर मैं पीछे हट गया… उसने फिर कोशिश की, मैं फिर पीछे हो गया… पर फिर मैंने नीचे होकर उसके होंठों को अपने होंठों में जकड़ लिया.

दीक्षा किस करने में अच्छी थी, सेक्स उसमें नेचुरल था. हम दोनों के होंठ एक दूसरे में गुत्थमगुत्था हो गए, हमारी जीभें एक दूसरे के साथ कबड्डी खेलने लगी।
यह मेरी लाइफ की बेस्ट किस थी जिसके बाद मैं जान गया था कि दीक्षा ही वो लड़की थी जिसे मैं लाइफ पार्टनर बनाऊंगा।