मेरी छात्रा की पहली चुदाई

मेरे हाथ उसके भरे-पूरे मम्मों को फिर सहलाने लगे थे पर इस बार प्यार से।
मैं धीरे-2 नीचे हुआ और उसकी निक्कर को खोल दिया। मैंने एक नज़र उसकी तरफ देखा तो उसने हामी में सिर हिला दिया।
मेरी तो खुशी का ठिकाना ही न रहा… मैं इतने जोश में आ गया कि अगले ही पल उसके बदन से उसकी निक्कर और पैंटी अलग होकर नीचे ज़मीन पर पड़े थे।

“आप तो बड़े बेसबरे हो?” उसने शर्माते हुए कहा।
“दिकू… बेसबरा मैं नहीं, कोई और है जो इस समय मेरी पैंट में फड़फड़ा रहा है और मुझे सता रहा है” मैंने अपनी जीन्स उतारते हुए कहा।
“चल झूठे… ऐसा कोई नहीं है.” उसने बच्चों की खिलखिला के कहा।

मेरी जीन्स उत्तर चुकी थी, मैं सिर्फ कच्छे में था। मैं कच्छा भी उतारने जा रहा था कि उसने मुझे रुकने का इशारा किया अपना सर हिला के।
मैं रुक गया, वो उठी और सोफे पर घुटनों के बल बैठ गयी. उसने अपने दोनों हाथ आगे किये और मेरे कच्छे को नीचे कर दिया।

लेकिन जैसे ही उसने मेरे कच्छे को नीचे किया मेरा मूसल जैसा लन्ड उसके गालों से जा टकराया।
“ओह माई गॉड!” उसके मुँह से यकायक निकल गया।
“क्या हुआ दिकू?” मैंने उसे छेड़ते हुए कहा।
“कितना बड़ा है… बिल्कुल मोटे डंडे जैसा!”

“क्या कितना बड़ा है?” मुझे उसे छेड़ने में मज़ा आने लगा था
“आपका वो और क्या!”
“वो क्या दिकू?”
“आपका नुन्नू और क्या!”
“नुन्नू? वो तो बच्चों का होता है।”
यह कहते हुए मैंने उसे सोफे पर लिटा और उसकी टाँगें फैलाकर उनके बीच घुटनों के बल बैठ गया। बिल्कुल छोटी सी गुलाबी रंग की बुर थी, उसका छेद नज़र ही नहीं आ रहा था, ऐसे लग रहा था जैसे उसकी चूत की फांकों के बीच छेद ही न हो।

जैसे ही मैंने उसकी बुर पर लौड़ा रखा हम दोनों को ज़ोर दार करंट लगा। उसकी छोटी सी बुर पर मेरा घोड़े जैसा लन्ड अजीब लग रहा था, एक पल के लिए तो मुझे भी लगा कि नहीं जाएगा। उसके मोम्मों को कस के पकड़ लिया, वो बिल्कुल वैसे हो दिखने लगे जैसे कि गुब्बारा बीच में से दबाने पर दिखता है।
मैंने एक ज़ोरदार धक्का दिया पर लन्ड अंदर जाने की जगह ऊपर को फिसल गया। एक दो और धक्के लगाए पर चूत ने तो लौड़ा लेने से साफ इंकार कर दिया।

मैं यह बिल्कुल नहीं चाहता था कि घोड़ी बिदक जाए… इसलिए मैंने हाथ से उसकी चूत की फांकों को थोड़ा खोला और टोपे को किसी तरह थोड़ा सा फंसा दिया। वो आँखें बंद करके लेटी हुई थी, जैसे बच्चे इंजेक्शन लगने से पहले आँखें बंद कर लेते हैं।

मैंने उसके कंधों को मजबूती के साथ पकड़ लिया और एक कसके धक्का लगाया. पक की आवाज़ के साथ मेरा तीन इंची टोपा उसकी फुद्दी में घुस गया।
वो दर्द से बिलबिला उठी- आ आ ओह माँ मर गई!
पर उसने ‘निकालो विकालो…’ जैसी कोई चीज़ नहीं कही बल्कि अपनी टाँगों को मेरे चारों ओर कस लिया और मुझे बाहों में भर लिया।
मैं दर्द को उसके चेहरे पर साफ देख सकता था।

मैं कुछ देर के लिए रुक गया मेरे लन्ड का टोपा अभी भी उसकी छोटी सी चूत में फंसा हुआ था।
मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया और उसके पसीने से भीगे हुए बालों को सँवारते हुए कहा- बस शोना बस… हो गया!

कुछ मिनट के लाड़ से वो कुछ सामान्य हुई तो मैंने एक और धक्का दिया पर लन्ड कुछ ही अंदर जा पाया। ऊपर से उसकी साँसें तेज़ हो गयी, आंखें ऊपर चढ़ गई… उसने इतने ज़ोर से मुझे हग किया कि उसके नाखून मेरी पीठ में गड़ गए। मैं समझ गया कि ये नाजुक कली और नहीं सह पाएगी… पर मैं क्या करता लन्ड तो अभी तक लगभग बाहर ही था।

मैंने एक आखिरी कोशिश करने की सोची और पूरी ताकत से एक झटका पेल दिया और लन्ड सीधा जाके उसकी चूत की झिल्ली से टकराया पर शुक्र है भगवान का कि उसकी सील नहीं टूटी, वरना बेचारी का क्या होता ये कोई नहीं जानता।
“आ… आ… ओह… माँ…” उसकी सिसकारियाँ पूरे कमरे में एक बार फिर गूँज उठी, उसका रंग सफेद पड़ गया झटका हल्का सा भी तेज होता तो पक्का वो बेहोश हो जाती।

अब मैंने उसके कंधे छोड़ दोबारा उसके मम्मे पकड़ लिए और आधे लन्ड से ही हल्के-2 झटके देना शुरू कर दिए. लन्ड उसकी चूत में गर्मी से पिघला जा रहा था, लग रहा था अब गया तो अब गया।
पर झटके देने जारी रखे मैंने… मुझे लग रहा था मैं पहले झड़ जाऊंगा पर वो 5-6 मिनटों में ही झड़ गयी उसकी चूत रस से लबालब भर गयी।
मैंने दो चार घस्से ही और लगाए कि मेरा भी टाइम आ गया। मैंने जल्दी से लन्ड बाहर निकाला और उसके पेट पर झड़ गया।

हम दोनों ही इतने थक चुके थे कि वहीं सोफे पर ही सो गए।

एक घंटे बाद मेरी नींद खुली, वो अभी सो रही थी। मैंने उसे जगाया और उठा के बाथरूम में ले गया वहां हमने गर्म पानी का शावर लिया, फ्रेश हुए।

समय काफी हो चुका था, वो पहले ही काफी लेट थी। हमने जल्दी से कपड़े पहने एक को किस करके विदा ली।
मैं उसे जाते हुए देख रहा था… वो हल्की-2 लंगड़ा के चल रही थी।

अजीब सी प्यार भरी अनुभूति मेरे दिल को हुई कि आखिर कोई सच्चा प्यार करने वाला मुझे भी मिल गया।