टीचर से सेक्स: सर ने मुझे कली से फूल बनाया

तभी रास्ते में सुनसान सी जगह में एक अकेले से अध-बने घर के सामने गाड़ी रोक दी. ये घर अभी तैयार भी नहीं था, लेकिन सर ने उसके सामने ही कार रोक दी. उन्होंने खुद उतर कर गेट खोल कर कार अन्दर कर ली, फिर से गेट लॉक किया.

फिर सर बोले- आओ मेरी जान.
मेरा हाथ पकड़ सर ने मुझे बाहर निकाला और मुझे बांहों में उठा एक कमरे में ले गए. वहां एक तख्तपोश जो काफी बड़ा था और जिसपे गद्दा बिछा हुआ था. उसपे मुझे लिटा दिया.

मैं- सर नहीं.. यह गलत है.
वह बोले- प्यार में कुछ गलत नहीं होता.

वो मुझपे छाने लगे. उन्होंने मेरी टी-शर्ट उतार दी और ब्रा में कैद मेरे ताज़ा अनछुए चूचों को दबाया, तो मेरे मुख से मीठी मीठी आहें निकलने लगीं.

मुझे मज़ा आता देख उन्होंने मेरी ब्रा उतार दी और मेरे एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसा. फिर उसपे जैसे ही ज़ुबान फेरी, मैं पागल होने लगी. उन्होंने एक एक कर अपने और मेरे बचे कपड़े भी उतार दिए.

जब मेरी नज़र उनके नाम की तरह उनके विशाल लंड पर गई, जो मेरी रेशमी दूध सी सफेद जांघों पर घिस रहा था.. तो मैं चौंक गई. मैं पहली बार किसी मर्दाना लंड को देख रही थी.

उन्होंने मेरी टांगें खोलीं और बीच आकर अपनी जुबान को मेरी चूत की फांकों पर लगा कर छेड़ा, तो मैं वासना की आग में जलने लगी. वो जैसे जैसे मेरी चूत में ज़ुबान आगे पीछे करते, मैं अपने चूतड़ उठा लुत्फ उठाती.
इस काम में इतना मज़ा होगा सोच भी नहीं था.

अब सर ने खुद को घुमा लिया. उनका लंड मेरे मुँह की तरफ था और सर मेरी चूत को पागलों की तरह चाट रहे थे. लंड मेरे मुँह के पास था.
सर ने कहा- चूसो गीता.
मैंने सर के गर्म लंड को मुँह में डाल लिया और लंड चूसने लगी. हम दोनों ने करीब दस मिनट एक दूसरे को चूसा. इस बीच एक बार तो उनकी ज़ुबान की कामुक हरकतों से मेरी चूत पानी पानी हो गई.

फिर सर ने बड़े प्यार से मुझे सीधा लिटाया और पास पड़े कपड़ों को गोल सा करके मेरे चूतड़ों के नीचे रख दिया.
आने वाले दर्द से अनजान, मैं मस्ती में उनके नीचे लेटी हुई थी.
तब उन्होंने लंड को थूक से गीला किया और उंगलियों से चूत की फांकों को फैला कर अपना सुपाड़ा सैट कर दिया, फिर मेरे दोनों कंधों पर हाथ टिकाए, मेरे होंठ मुँह में भर सर ने झटका दे मारा.

उस झटके ने मुझे होश में ला दिया. मेरी चूत में लंड फंस चुका था, मेरी आंखों से आंसू बहने लगे. बस दो तीन झटकों में सर का पूरा लंड मेरी कुंवारी चूत में घुस गया.

थोड़ा रुक कर सर ने आधा लंड निकाल फिर से घुसा दिया, ऐसा तीन चार बार करने से मुझे थोड़ा सुकून मिला. जब लंड आराम से चलने लगा, तो सर ने मेरे होंठ आज़ाद किए.

मैं- यह आपने क्या किया सर?
सर- बेबी, बस पहली बार होता है.. एक बार पूरा स्वाद ले लो, फिर खुद मेरा लंड मांगा करोगी.

सर ने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी, साथ साथ वे मेरे चूची को चूसने लगे. मुझे भी मज़ा आने लगा. सर की बात सही निकली, मैं खुद उनकी पीठ पर नाखून गाड़ कर, गांड उठा उठा चुदवाने लगी.

‘आह उह उफ़ उम्म्ह… अहह… हय… याह… सी सी आह उह ऊऊ …’ की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं.
‘आह करो करो..’ कह कर मैं झड़ने लगी. सर अभी भी मुझे चोदने में लगे थे. मेरी चूत पिघल गई और उसकी गर्मी से सर के लंड ने भी तेज बौछारें मेरी चूत में गिरा दीं.

सर ने मुझे बांहों में कस लिया और अपनी आखिरी बूंद तक लंड को मेरी चूत में झाड़ते रहे.

कुछ देर बाद हम अलग हुए. मैंने उठ कर देखा कि मेरी चूत फूल चुकी थी और सर के लंड पर खून था. मेरी जांघों पर भी खून लगा था. साफ सफाई कर कपड़े डालने लगी. मेरी छातियों पर जगह जगह निशान बन गए थे.
सर ने मुझे कली से फूल बना दिया था.

अब रोज़ शाम को किसी कोने में सर का लंड चूसती और हफ्ते दस दिन बाद सर मुझे वहीं ले जाते और मेरी चूत को लंड खिला देते.

यह तो थी मेरी पहली चुदाई. अगली कहानी में बताऊंगी कि कैसे टूर्नामेंट खेलने गई और वहां कैसे मैंने बेशर्मों की तरह और लंड खाए.

कैसी लगी मेरी की कहानी, मेरी मेल आईडी पर मेल करके जरूर बताना.
आपकी अपनी गीता

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