विधवा पड़ोसन आंटी की प्यासी चूत

अब मैं उठा और आंटी के पैरों को फैलाकर अपना लंड आंटी की चूत पर सेट किया. चाटने के कारण आंटी की चूत पहले ही पूरी गीली हो चुकी थी. फिर मैंने जोर से एक धक्का मारा और एक ही बार में मेरा लंड आंटी की चूत में घच की आवाज के साथ घुस गया. आंटी की गर्म चूत का अहसास मेरे लंड पर इतना अच्छा लग रहा था कि पूछो ही मत!…

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और मैं इंदौर का रहने वाला हूँ. मैं अन्तर्वासना पर रोज कहानी पढ़ता हूँ. मैं पिछले 5 सालों से अन्तर्वसना पर कहानियां पढ़ रहा हूँ. इस दौरान प्रकाशित की गई अन्तर्वसना की लगभग हर एक कहानी को मैंने पढ़ा है. अन्तर्वसना की कहानियां मुझे बहुत अच्छी लगती हैं तो मैंने सोचा कि क्यों न मैं भी यहां पर अपनी कहानी लिखूं और आप सबको पढ़ाऊँ.

दोस्तों, मेरी यह कहानी तब की है, जब मैं 12वीं में पढाई कर रहा था. उस समय मेरे घर के सामने वाले घर में एक आंटी रहती थी. उनको एक लड़की और एक लड़का था. लड़का बड़ा था और वह एक कंपनी में काम करता था. वो रोज सुबह ही काम पर चला जाता था और फिर शाम पांच बजे ही आता था.

उनकी लड़की 18 साल की थी और वो अभी पढ़ाई करती थी. वह बहुत मस्त और सेक्सी लड़की थी. जो भी उसको देख ले उसका लन्ड तो खड़ा होना ही था. यही हाल मेरा भी था. उसको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मन करता था कि बस अभी उसे पकड़ लूँ और अपना हथियार उसकी चूत में डाल कर चोद दूँ.

आंटी भी अभी 40 साल की ही थीं. वो भी अपनी बेटी की ही तरह बहुत सेक्सी थीं. उनका फिगर 36-28-38 का था. बूब्स तो इतने मस्त थे कि मन करता था कि अगर मिल जाएं तो पकड़ कर मसल डालूं.

जब आंटी के घर में कोई नहीं रहता था और उन्हें कोई काम पड़ जाता था तो वो मुझे बुला लेती थीं. मैं भी कभी इंकार नहीं करता और जाकर उनका काम कर देता था. आंटी के पति 10 साल पहले मर गए थे. एक दिन मेरे घर में कोई नहीं था तो मैं टीवी लगाकर ब्लू फ़िल्म देख रहा था. इस दौरान मेरा 7 इंच का लंड पूरा खड़ा हो गया था. फिर मैंने अपनी पैंट उतारी और मुठ मारने लगा. मैं जोर – जोर से मुठ मार रहा था. ऐसा करने में मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं भूल ही गया कि मेन गेट अभी खुला हुआ ही है.

अभी मैं अपना लंड हिला ही रहा था कि तभी अचानक से मेरी नजर सामने पड़ी. नज़र सामने पड़ते ही मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. सामने आंटी खड़ी थीं. उन्हें सामने देख कर डर के मारे तो मेरा बुरा हाल हो गया.

तभी आंटी बोलीं, “ये क्या कर रहे हो?” तब मुझे होश आया और मैंने झट से पैंट पहन ली और बोला, “आंटी, प्लीज किसी को बताना मत.” तो आंटी बोली, “ठीक है, नहीं बताउंगी पर तू अगर मेरी बात मानेगा तो.”

मैं बोला, “मैं आपकी हर बात मानूँगा.” तो आंटी बोली, “मेरे घर चलो.” मैं बोला, “ठीक है, चलो.” और फिर मैं आंटी के साथ चुपचाप उनके घर चला गया. वहां जाकर आंटी बोली, “तुम ये सब क्यों करते हो?” तो मैं कुछ नहीं बोला और चुपचाप खड़ा रहा. तो आंटी बोली, “कभी किसी लड़की के साथ भी किया?”

मैं बोला कि नहीं तो वो बोली, “मतलब सिर्फ हिला के ही काम चलाओगे?” इसपर मैं कुछ नहीं बोला. तो वो फिर बोलीं, “किसी औरत के साथ करोगे?” मैं बोला, “किसके साथ?” तो वो बोली, “तू बता करेगा कि नहीं.” मैं बोला, “हां, करूँगा.” तो वो बोली, “तुझे मेरे साथ करना है.”

मुझे तो अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मुझे इस तरह आंटी की चुदाई करने का मौका भी मिल जायेगा. मैं झट से राजी हो गया और बोला, “क्यों नहीं करूंगा.” तो आंटी बोली चलो रूम में. फिर हम दोनों बेडरूम में चले गए.

अंदर जाकर आंटी ने गेट बंद किया और बेड पर बैठ गई. फिर मैं भी बेड पर चढ़ गया और आंटी को किस करने लगा. अब आंटी भी बेतहासा मुझे चूमने लगी थीं. हम दोनों एक – दूसरे के मुंह में जीभ डाल कर चूस रहे थे.

तभी मेरा एक हाथ आंटी की चूची पर पहुंच गया और मैं ब्लाउज़ के ऊपर से ही आंटी की चूची को मसलने लगा. अब मेरा लंड अकड़ने लगा था तो मैंने एक ही झटके में आंटी का ब्लाउज़ और ब्रा उतार दिया. जिससे आंटी की दोनों चूची एक साथ ही बाहर आ गई थीं.

अब मैं दोनों हाथों से आंटी की चूची मसलने लगा. आंटी मदहोश हुई जेआ रही थीं और इनके मुंह से जोर से ‘स स श श जोर से मसल डालो मेरी चूची को बेटे, आह आह’ की आवाजें आ रही थीं.

फिर आंटी ने मेरे लंड को पकड़ लिया और सहलने लगीं तो कुछ ही देर में मैंने आंटी का पेटीकोट उतार दिया. आंटी ने अंदर कुछ नहीं पहना था. काली झांटों में आंटी की चूत क़यामत लग रही थी. जिसे देख मैं तो पागल हो रहा था.

फिर मैंने आंटी की चूत में अपनी एक उंगली डाल दी और उस उंगली से आंटी को चोदने लगा. अब आंटी तेज – तेज चिल्लाने लगी थीं. उनके मुंह से ‘आह आह अस अस स’ की आवाजें आ रही थीं. अब मैं आंटी के पैरों के बीच में आ गया और आंटी की चूत में जीभ डाल के उनकी चूत चूसने लगा.

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